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योग के मà¥à¤–à¥à¤¯ चार पà¥à¤°à¤•ार होत हैं। राज योग, करà¥à¤® योग, à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ योग और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ योग।
योग समाधि के अंतिम चरण को सिरà¥à¤« राज योग कहा जाता है। इसे सà¤à¥€ योगों का राजा माना जाता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के योग की विशेषता है। इसमें आतà¥à¤®-निरीकà¥à¤·à¤£ करने के लिठरोजमरà¥à¤°à¤¾ की जिंदगी से कà¥à¤› समय निकालना शामिल है। यह इस तरह का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ है जो हर कोई कर सकता है।
यम (शपथ)
नियम (आतà¥à¤® अनà¥à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨)
आसन (मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾)
पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® कैसे करें(सांस नियंतà¥à¤°à¤£)
वापसी (इंदà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का नियंतà¥à¤°à¤£)
दृषà¥à¤Ÿà¤¿ (à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾)
धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ (मेडिटेशन)
समाधि (ईशà¥à¤µà¤° से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ या मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿)
2. जà¥à¤žà¤¾à¤¨ योग
योग को जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का मारà¥à¤— माना जाता है। यह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के लिठजà¥à¤žà¤¾à¤¨ ओर परिचय का à¤à¤• उपकरण है। इससे मन का अंधकार, अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ अजà¥à¤žà¤¾à¤¨ दूर होता है। कहा जाता है कि आतà¥à¤®à¤¾ की शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के योग से होती है। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करते समय शà¥à¤¦à¥à¤§ रूप को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना जà¥à¤žà¤¾à¤¨ योग कहलाता है।इसके साथ ही योग के गà¥à¤°à¤‚थों के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का विकास होता है। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¯à¥‹à¤— सबसे कठिन माना जाता है। अंत में बस इतना ही कहा जा सकता है कि सà¥à¤µà¤¯à¤‚ में खोई हà¥à¤ˆ विशाल संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤“ं की खोज करके और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को बà¥à¤°à¤¹à¥à¤® में डà¥à¤¬à¥‹ कर, इसे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ योग कहा जाता है।
3. करà¥à¤® योग
हम इस शà¥à¤²à¥‹à¤• के माधà¥à¤¯à¤® से करà¥à¤® योग को समà¤à¤¤à¥‡ हैं। योग करà¥à¤® विधान का अरà¥à¤¥ है करà¥à¤® में लीन होना। शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ ने à¤à¥€ गीता में कहा है कि हाथ योग करà¥à¤®à¤¸à¥ कौशलमॠ’का अरà¥à¤¥ कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾ से काम करना है। करà¥à¤® योग का सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त यह है कि वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में हम जो कà¥à¤› à¤à¥€ अनà¥à¤à¤µ करते हैं वह हमारे पिछले कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर आधारित है। करà¥à¤® योग के माधà¥à¤¯à¤® से, कोई à¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ किसी à¤à¥€ मोह में पड़ने के बिना सांसारिक गतिविधियों को करता है और अंततः ईशà¥à¤µà¤° में लीन हो जाता है। यह योग घर के लोगों के लिठसबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ माना जाता है।
4. à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ योग
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ का अरà¥à¤¥ है दिवà¥à¤¯ पà¥à¤°à¥‡à¤® और योग का अरà¥à¤¥ है जà¥à¤¡à¤¼à¤¨à¤¾à¥¤ à¤à¤—वान, जानवरों, जानवरों, पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ आदि के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ समरà¥à¤ªà¤£, पà¥à¤°à¥‡à¤® और à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ को à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ योग माना जाता है। à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ योग किसी à¤à¥€ आयॠधरà¥à¤® राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के गरीब और अमीर लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जा सकता है। हर कोई किसी को अपना à¤à¤—वान मानता है, केवल उस पूजा को à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ योग कहते हैं। यह à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ निसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ à¤à¤¾à¤µ से की जाती है ताकि हम अपने लकà¥à¤·à¥à¤¯ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रूप से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर सकें।
5. हठयोग
यह पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ है। हतà¥à¤¥à¤¾ में हन का अरà¥à¤¥ है नोड यानी सचà¥à¤šà¤¾ नाक सà¥à¤µà¤° जो पिंगला नाड़ी है। इसी समय थानो का अरà¥à¤¥ है बाà¤à¤‚ नासिक सà¥à¤µà¤°, जिसे आदà¥à¤¯à¤¾ नाड़ी कहा जाता है, जबकि योग दोनों को जोड़ने का काम करता है। हाथ योग के माधà¥à¤¯à¤® से इन दोनों चैनलों के बीच संतà¥à¤²à¤¨ बनाठरखने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया जा रहा है।
à¤à¤¸à¤¾ माना जाता है कि पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ काल में, आयà¥-वार ऋषियों ने हठयोग का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ किया था। हठयोग का पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ इन दिनों बहà¥à¤¤ बढ़ गया है। à¤à¤¸à¤¾ करने से आप शारीरिक रूप से सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ और मानसिक रूप से शांत रह सकते हैं।
6. कà¥à¤‚डलिनी/लय योग
योग के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मानव शरीर में सात चकà¥à¤° होते हैं। जब कà¥à¤‚डलिनी को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के माधà¥à¤¯à¤® से जागृत किया जाता है, तो ऊरà¥à¤œà¤¾ जागृत होती है और मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में जाती है। इस समय के दौरान यह सà¤à¥€ सात चकà¥à¤°à¥‹à¤‚ को सकà¥à¤°à¤¿à¤¯ करता है। इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को कà¥à¤‚डलिनी / ताल योग कहा जाता है। इसमें मनà¥à¤·à¥à¤¯ अंदर से पैदा हà¥à¤ शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की कोशिश करता है. जिसे नाद कहा जाता है, जो बाहर से जंग से मà¥à¤•à¥à¤¤ होता है। इस पà¥à¤°à¤•ार के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से मन की निपà¥à¤£à¤¤à¤¾ समापà¥à¤¤ हो जाती है और à¤à¤•ागà¥à¤°à¤¤à¤¾ बढ़ती है।
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